जौनपुर में श्रद्धापूर्वक गोवर्धन महाराज की पूजा आयोजित

जौनपुर। पांच दिवसीय दीपोत्सव के तहत रविवार को गोवर्धन पूजा विधि विधान के साथ संपन्न हुई। श्री दुर्गा पूजा महासमिति के पूर्व अध्यक्ष शशांक सिंह रानू के शहर में ढालगर टोला स्थित निवास पर गोवर्धन पूजा का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें विशिष्ट व्यक्तियों ने हिस्सेदारी की। गौरतलब है कि यह पूजा मुख्य रूप से ब्रज क्षेत्र में किसान और पशु पालक करते हैं, क्योंकि जीविका के लिए वो प्रकृति पर सबसे अधिक निर्भर रहते हैं। इस पूजा में सभी लोग सुबह उठकर स्नान करते हैं। घर की रसोई में ताजे पकवान बनाए जाते हैं। गोबर और मिट्टी को मिलाकर गाय, गोवर्धन पर्वत, श्रीकृष्ण, खेत के औजारों की प्रतिमा बनाई जाती है। सभी की पूजा की जाती है। नैवेद्य चढ़ाया जाता है। भगवान कृष्ण की भी पूजा की जाती है। पूजा के बाद सभी को प्रसाद का वितरण किया जाता है।

इस अवसर पर परंपरानुसार गोवर्धन महाराज की सात परिक्रमा श्रद्धालुओं ने की। रसिया भजन भी गाए गए। खास बात यह है जौनपुर में विधिपूर्वक गोवर्धन पूजा करीब पांच दशक पूर्व कीर्तिशेष गजेन्द्र सिंह द्वारा आरंभ की गई थी। मूल रूप से ब्रज क्षेत्र के ही निवासी प्रो.गजेन्द्र सिंह स्थानीय तिलकधारी महाविद्यालय कृषि संकाय के पादप रोग विज्ञान के विभागाध्यक्ष रहे। यहां आए तो यहीं के होकर रह गये। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति भाव रखने वाले प्रो.गजेन्द्र सिंह ने जौनपुर में ब्रज की संस्कृति और परंपराओं को यहां पल्लवित और पुष्पित किया। उनका परिवार उसी परम्परा को आगे बढ़ा रहा है।

पूजन कार्यक्रम में मुख्य रूप से उमेशोनाथ मंदिर के महंत बाबा महेंद्र दास, आचार्य निशाकांत द्विवेदी, आचार्य डॉ. रजनीकांत द्विवेदी, आचार्य डॉ. गंगाधर शुक्ल, डॉ.जी.सी.चौबे,आदि लोगों का प्रमुख सहयोग रहा। जैसा कि सभी लोग जानते हैं कि गोवर्धन पूजा श्री कृष्ण लीला के एक अध्याय से जुड़ा हुआ आयोजन है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को भगवान इन्द्र के कोप से हो रही मूसलधार वर्षा से बचाने के लिए सात दिन तक गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी उंगली पर उठाकर रखा था, तो गोप-गोपिकाएं उसकी छाया में सुखपूर्वक रहे। सातवें दिन भगवान ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखा और हर वर्ष गोवर्धन पूजा करके अन्नकूट उत्सव मनाने की आज्ञा दी।

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