संतानों पर भगवान गणेश की कृपा के लिए व्रती महिलाओं द्वारा चौथ की पूजा

जौनपुर। गणेश चौथ का पर्व रविवार को देर शाम पूर्ण श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। हिंदू धर्म में माघ महीने में पड़ने वाली चतुर्थी का विशेष महत्व होता है। इसे संकष्टी चतुर्थी के नाम से जानते हैं। इस दिन सभी घरों में भगवान गणेश का व्रत और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। चतुर्थी का शुभ पर्व भगवान गणेश जी को समर्पित है। सकट का अर्थ यहां पर संकट से है। इस दिन भगवान गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाले समस्त प्रकार के कष्टों को दूर करने में मदद मिलती है। चौथ का व्रत जीवन में सुख समृद्धि लाता है। इस व्रत को संतान के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन को संकटा चौथ, तिलकुट चौथ या संकष्टी चतुर्थी नामों से भी जाना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सकट चौथ के दिन व्रत रखने से संतान निरोगी, दीर्घायु और सुख-समृद्धि से परिपूर्ण होती है। मां द्वारा रखा जाने वाला यह व्रत बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधा को भी दूर करने वाला माना गया है। संतान पर भगवान गणेश की कृपा और आशीष बना रहता है। इस दिन मां अपने बच्चों के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान गणेश को तिल, गुड, गन्ना और तिल का भोग लगाया जाता है। यह व्रत चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूर्ण माना जाता है। महिलाएं शाम को भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करने के साथ ही व्रत कथा और आरती पढ़ती या सुनती हैं। शास्त्रों के अनुसार, चंद्रमा को औषधियों का स्वामी और मन का कारक माना जाता है। चंद्रदेव की पूजा के दौरान महिलाएं संतान के दीर्घायु और निरोगी होने की कामना करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने से सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह पर्व हमेशा से बड़े ही भक्तिभाव से मनाया जाता है।

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