जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जे का बिगुल बजा

सत्तारूढ़ भाजपा की रणनीति पर सपा और धनंजय की पैनी नज़र

जौनपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। निर्वाचन आयोग ने नामाकंन की तारीख 26 जून और मतदान एवं मतगणना 3 जुलाई को होना सुनिश्चित किया है। समाजवादी पार्टी ने इस प्रतिष्ठित पद पर अपनी कब्जेदारी बरकरार रखने के लिए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती यादव की बहू निशी यादव को मैदान में उतारा है। संख्या बल को लेकर सपा इत्मिनान की स्थिति में है। इधर पूर्व सांसद धनंजय सिंह अपनी पत्नी श्रीकला को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर इस पद पर काबिज कराने की मुहिम में जुटे हुए हैं। लगातार सियासी शिकस्त खा रहे धनंजय सिंह किसी भी तरह यह बाज़ी जीतना चाहते हैं। भाजपा अभी मजबूत और करिश्माई उम्मीद्वार की तलाश में है क्योंकि संख्या बल की दृष्टि से वह बेहद कमजोर स्थिति में है।

जिला पंचायत अध्यक्ष पद का इतिहास बताता है कि हर तरह के लोग इस कुर्सी पर आसीन हो चुके हैं। इस कुर्सी पर रामलगन सिंह ने हैट्रिक लगायी है तो वहीं पहली महिला अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ था श्रीमती कमला सिंह को। उनके बाद प्रभावती पाल, कलावती यादव,अनिता सिध्दार्थ और शारदा दिनेश चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष पद महिलाओं के लिए सुरक्षित रखा गया है।

अब तक चुने गये अध्यक्षों की सूची के मुताबिक सन् 1937 से 1939 तक आचार्य बीरबल अध्यक्ष रहे। उनके बाद 1940 से 1941 तक राजा हरपाल सिंह, 1942 से लेकर 1945 तक राजा श्रीकृष्ण दत्त दुबे, 1946 से 1951 तक रऊफ जाफरी इस कुर्सी पर बैठ चुके हैं। उमाशंकर सिंह 1952 से 1953 और ठा. राम लगन सिंह 1954 से 1959 तक चेयर मैन रहे। दो मार्च 1959 से लेकर 31 दिसम्बर 1961 तक बतौर प्रशासक डीएम के हाथ में कमान रही। एक जनवरी 1962 से लेकर 1970 तक पुनः जिले के धाकड़ कांग्रेसी नेता रामलगन सिंह अध्यक्ष रहे। 23 मार्च 1970 से लेकर 31 मार्च 1974 तक डीएम इसके प्रशासक बनाये गये। एक अप्रैल 1974 से 12 अगस्त 1977 तक फिर एक बार राम लगन सिंह का अध्यक्ष पर कब्जा रहा। 13 अगस्त 1977 से 23 जनवरी 1989 तक डीएम इसके प्रशासक रहे।

इसके बाद 24 जनवरी 1989 से 19 मई 1990 तक जिले की राजनीति में बेहद तेजी से फर्श से अर्श पर पहुंचने वाले कुंवर विरेन्द्र प्रताप सिंह अध्यक्ष रहे। 20 मई 1990 से 31 मई 1993 तक सीधे-साधे व्यक्ति माने जाने वाले राजपति यादव इसके कार्यकारी अध्यक्ष रहे। एक जून 1993 से लेकर 22 मई 1995 तक जिले में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता एवं पूर्व सांसद कमला सिंह अध्यक्ष पद पर रहे।
पहली महिला अध्यक्ष श्रीमती कमला सिंह ने 23 मई 1995 से 14 जुलाई 2000 तक अध्यक्ष पद पर कार्य किया। इसके बाद डीएम 15 जुलाई 2000 से लेकर पांच अगस्त 2000 तक इसके प्रशासक रहे। छह अगस्त 2000 से लेकर एक अक्टूबर 2005 तक प्रभावती पाल अध्यक्ष रही।

10 अक्टूबर 2005 से लेकर 13 जनवरी 2006 तक डीएम ने इसकी कमान संभाली थी। 14 जनवरी 2006 से लेकर 2011 तक कलावती यादव अध्यक्ष रहीं। उसके बाद अनीता सिध्दार्थ और फिर शारदा दिनेश चौधरी ने महिला अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। समाजवादी पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष राजबहादुर यादव ने 14 जनवरी 2015 से 2020 तक इस पद को सुशोभित किया।
सबसे खास बात यह है कि इस कुर्सी पर कब्जेदारी के लिए मोटी रकम खर्च करके खरीद-फरोख्त होने समेत हर तरह के हथकंडे अपनाए जाने का इतिहास रहा है। विपक्षी नेताओं ने अभी ताजा-ताजा स्थानांतरित हुए पुलिस अधीक्षक राजकरन नय्यर को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगा रखा है। उनके अनुसार इस चुनाव में भाजपा सत्ता की ताकत इस्तेमाल कर रही है।

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