मेडिकल कालेज का निर्माण पूरा करने में फिर जुटा टाटा प्रोजेक्ट्स, 30 करोड़ का जुर्माना भी माफ

सितंबर 2022 तक 'उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय' को चालू करने की नई डेडलाइन तय

जौनपुर। शाहगंज मार्ग पर सिद्दीकपुर में करीब 6 साल से सुस्त रफ्तार से बन रहे मेडिकल कालेज का रुका हुआ काम एक बार फिर शुरू हो गया है। टाटा प्रोजेक्ट्स को ही फिर से मेडिकल कालेज के निर्माण का काम पूरा करने की जिम्मेदारी मिली है। शासन द्वारा सितंबर 2022 तक मेडिकल कालेज को चालू करने की नई डेडलाइन तय की गई है। हालांकि प्रदेश सरकार के नये ‘ऐतिहासिक बजट’ में जौनपुर के मेडिकल कालेज का कोई जिक्र न होने से लोग क्षुब्ध हैं। लोगों का कहना है कि अन्य जिलों में बन रहे मेडिकल कालेजों के लिए बजट में व्यवस्था की गई है, लेकिन जौनपुर का जिक्र भी न होना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है।

राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक एमपी सिंह का कहना है कि टाटा प्रोजेक्ट्स को सितंबर 2022 तक निर्माण पूर्ण करने की मोहलत दी गई है। यह फैसला शासन स्तर का है। कोशिश रहेगी कि मजदूरों की संख्या बढ़ाकर इस बार तय समय से पहले गुणवत्तापूर्ण ढंग से काम पूरा करा लिया जाए। पहले से ही यह परियोजना टाटा प्रोजेक्ट्स के हवाले है लेकिन पिछले दिनों काम की धीमी गति, मनमानी और अनियमितता जैसे आरोपों के कारण उसके हाथ से काम लें लिया। गया था, साथ ही उस पर 30 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगा दिया गया था। अब शासन से हरी झंडी मिलने के बाद कंपनी ने काम शुरू करा दिया है, जुर्माना भी माफ कर दिया गया है। गौरतलब है कि सितंबर 2014 में प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सिद्दीकपुर में बंद पड़ी कताई मिल के परिसर में राजकीय मेडिकल कालेज की नींव रखी थी। पांच सौ बेड वाले अस्पताल और मेडिकल कालेज का निर्माण 554 करोड़ रुपये में जून 2018 में पूरा कर लिए जाने का लक्ष्य निर्धारित था।

राजकीय निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था बनाते हुए धन भी अवमुक्त कर दिया गया। शुरुआत में काम तेजी से हुआ, मगर धीरे-धीरे इसकी रफ्तार थमती गई। कभी बजट के अभाव में तो कभी दूसरे कारणों से अब तक आधा काम ही हो सका है। सरकार बदलने के बाद इसको लेकर सियासत भी होती रही। सियासी मकड़जाल में उलझे इस प्रोजेक्ट का नाम भी ‘राजकीय मेडिकल कालेज’ से बदल कर जौनपुर निवासी पूर्ववर्ती कल्याण सरकार के मंत्री रहे स्व. उमानाथ सिंह के नाम पर कर दिया गया। फिर इसके साथ स्वशासी जोड़ दिया गया। इस बीच निर्माण सामग्रियों के दाम बढ़ने से इस परियोजना का बजट भी बढ़कर 597 करोड़ हो गया है। इसे पूरा करने की डेडलाइन दिसंबर 2021 तय की गई थी। पर्याप्त बजट होने के बाद भी काम की गति न बढ़ने पर राजकीय निर्माण निगम ने पिछले दिनों टाटा प्रोजेक्ट्स का टेंडर रद्द कर दिया था। धीमी गति, मनमानी, अनियमितता, अनुबंध की शर्तों का पालन न करने जैसे तमाम आरोपों के कारण उस पर 30 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया था। अधिकारियों ने दावा किया था कि अब नए सिरे से टेंडर कराकर तय समय में काम पूरा करने की कोशिश होगी। लेकिन फिर उसी कम्पनी को ही अधूरा मेडिकल कालेज पूरा कराने का काम दे दिया गया। उस पर लगाया गया जुर्माना तो माफ हुआ ही, इसे बनाने की समय सीमा भी बढ़ा दी गई है। मौजूदा स्थितियों को देखते हुए भविष्य में इस मेडिकल कालेज का क्या स्वरूप सामने आएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।

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