केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ कई संगठनों ने हिस्सा लिया ऑल इंडिया स्ट्राइक में

जौनपुर। केंद्र सरकार की श्रम नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और बैंक कर्मियों से जुड़ी यूनियनों द्वारा हड़ताल के आह्वान पर यहां जनपद में सम्बंधित ट्रेड यूनिटों के कर्मचारियों ने हड़ताल करते हुए पूरे दिन काम काज बन्द रखा। हड़ताल का असर बैंकों, बीएसएनल, आयकर कार्यालय सहित केंद्र सरकार के अन्य कार्यालयों पर स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ा। सरकारी अर्ध सरकारी कर्मचारियों के अलावा कम्युनिस्ट संगठन भी इस हड़ताल में शामिल रहे। हड़ताली कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में कार्यालयों के सामने धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी की। कलेक्ट्रेट परिसर में इस मौके पर एक जनसभा भी हुई जिसमें विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
भारतीय मजदूर संघ को छोड़कर 10 केंद्रीय श्रमिक संघों ने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों के खिलाफ इस हड़ताल का आह्वान किया था। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए), अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओए) और भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघ भी हड़ताल में शामिल रहे। हड़ताल के इस क्रम में पोस्ट आफिस के कर्मचारियों ने अखिल भारतीय डाक कर्मचारी संघ के बैनर तले मुख्य डाकघर के बाहर जम कर प्रदर्शन किया और सरकार के ऊपर श्रम विरोधी नीतियों को लागू करने का आरोप लगाया। सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार श्रमिक विरोधी हो गयी है। डाक कर्मचारी संघ के नेताओं ने चेतावनी दिया कि अगर सरकार हमारी मांगों को जल्द से जल्द नहीं मान लेती है तो अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए बाध्य होना पड़ेगा। डाक कर्मचारी संघ के लोगों ने सरकार के पास अपनी कई मांगों को लेकर एक पत्रक भी भेजा है, जिसमें पुरानी पेंशन बहाली, पेन्शनधारी कर्मचारियों की डीए बहाली, कमलेश चन्द्रा की सिफारिश लागू करने जैसी एक दर्जन मांग पत्रक में हैं। यहां की हड़ताल का नेतृत्व सभाजीत पाल, राम उजागिर यादव, हरिशंकर यादव तथा राजेश सिंह ने किया। पूरे दिन काम काज ठप रहने के चलते विभाग में लगभग 50 करोड़ रुपए का लेन देन प्रभावित रहा है।
इसके अलावा यूबीआई के भी सभी कर्मचारियों ने बैंकों मे तालाबन्दी किया और सड़क पर आ गये। बैंक के रीजनल आफिस (स्थित होटल रिवर व्यू) पर धरना प्रदर्शन हुआ। खबर मिली है कि स्टेट बैंक एवं पंजाब बैंक को छोड़ कर जनपद के सभी बैंकों में हड़ताल के कारण ताला लटकता दिखा। बैंक के हड़ताल का असर लेन देन पर पड़ा।अनुमान है कि इस हड़ताल से जनपद में लगभग एक अरब रुपये का लेन देन अधर में लटका रहा। इसका असर व्यवसाय पर नजर आया। श्रमिक संगठन सीआईटीयू के आह्वान पर यहाँ पर लोगों ने केन्द्र सरकार के मजदूर और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया। इस अवसर पर का.विजय प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान सरकार ने श्रमिकोंके अधिकारों को कमजोर करते हुए उन्हें पूंजीपतियों/ कारपोरेटों के रहमोकरम पर छोड़ दिया है।
दूर संचार विभाग के भी सभी कर्मचारियों ने अपने केन्द्रीय नेतृत्व के आह्वान पर तालाबन्दी कर मुख्यालय पर प्रदर्शन करते हुए अपना विरोध प्रदर्शित किया। दूर संचार यूनियन के नेताओं ने भी सरकार को श्रमिक विरोधी करार दिया है। हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा हड़ताल को रोकने के लिए राज्य कर्मचारियों को ‘एस्मा’ लागू कर हड़ताल से अलग कर दिया गया था, लेकिन केन्द्रीय कर्मचारियों पर इसका कोई असर नहीं था।

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