जौनपुर में कोरोना से 760 नए संक्रमित, शाहगंज में आजमगढ़ से आए रेल यात्री ने अस्पताल के बाहर दम तोड़ा

संक्रमित मरीजों की देखभाल में लापरवाही के आरोप, सेनेटाइजेशन का काम असंतोषजनक

जौनपुर। जिले में कोरोना की रफ्तार लगातार बढ़ती ही जा रही है, आज बुधवार को आधिकारिक रूप से जारी रिपोर्ट में 760 नए कोरोना के पुष्ट मरीज पाए गए हैं। इस प्रकार जिले में अबतक आधिकारिक रूप से पाए गए कोरोना के पुष्ट मरीजों की संख्या 11529 हो गई है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक पिछले चौबीस घंटे में कोरोना से संसूचित 4 मौतें हुई हैं जबकि इस अवधि में 161 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। रात आठ बजे नाइट कर्फ्यू का समय शुरू होने के बाद सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। लेकिन दवा की दुकानों पर उसके बाद देर तक ग्राहकों की भीड़ दिखाई दे रही है। आज की एक घटना हालात बेकाबू होने की तरफ इशारा कर रही है। शाहगंज में अस्पताल के बाहर एक युवक ने अपनी माँ की गोद में दम तोड़ दिया। आजमगढ़ से ट्रेन में सफर के दौरान सांस लेने में समस्या आने पर शाहगंज स्टेशन पर उतार कर मां लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहगंज पहुँची थी। आरोप लगे हैं कि उसे समय से उपचार नहीं हासिल हो सका।

शाहगंज के श्रीरामपुर रोड गल्लामंडी में कोरोना पॉजिटिव मरीज पाए जाने के बाद नगर पालिका प्रशासन ने बैरिंकेटिंग लगाकर के कैंटेनमेंट जोन बनाया है।एक युवक की वाराणसी लैब से आई रिपोर्ट में कोरोना संक्रमित पाया गया।जिसके बाद मोहल्ले के लोग परेशान हो उठे।जानकारी मिलने पर नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी दिनेश यादव ने मोहल्ले में बैरिकेटिग लगाकर कंटेनमेंट जोन बनाया।जिससे कि अन्य दूसरे लोग कोरोना संक्रमित होने से बचें।साथ ही लोगों को जोन के अंदर आवाजाही पर रोक लगाई है। इसके पूर्व जौनपुर मुख्यालय पर स्थित यूपी सिंह कालोनी को कैंटेनमेंट जोन बनाया जा चुका है। कोराना संक्रमण बढ़ता जा रहा है लेकिन बचाव और राहत के कार्यों में वांछित गति से प्रगति नहीं देखी जा रही है। पीड़ित मरीजों को अस्पतालों में आक्सीजन नहीं मिल पा रही है। मिल भी रही है तो उसे तरीके से संचालित करने वाले टेक्नीशिन की कमी है।

संक्रमित मरीजों की उचित देखभाल न होने के भी आरोप लगाये जा रहे हैं। व्यवस्था का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक पत्रकार की तबियत खराब हुई तो उसे उचित इलाज मिल सके इसके लिए पत्रकारों को नाकों चने चबाना पड़ा। अधिकारियों को 100 बार से अधिक फोन करने पर उसे उचित वार्ड में भर्ती कराया जा सका, जहां सन्तोष जनक देखभाल हो रही है। अब सामान्य लोगों का इलाज किस प्रकार से हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। आलम यह है कि सेनेटाइजेशन के नाम पर चन्द सरकारी भवनों को छोड़कर कई भी संक्रमण को कम करने वाली दवा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। जिन इलाकों में कोरोना के अधिक पेशेण्ट हैं वहां भी सेनेटाइजेशन नहीं कराया गया। शहर की सड़कों गलियों को भी अभी तक इससे अछूता रखा गया है।

लोगों का कहना है कि पूर्व वर्ष में जब कोरोना का कहर था तब सड़कों पर दवा का छिड़काव कराया गया था लेकिन इस बार मुश्किल से अस्पतालों में तथा सरकारी भवनों के आस पास ही छिड़काव हो रहा है। कहने को तो तमाम अस्पताल अधिग्रहित कर दिये गये हैं लेकिन वहां व्यवस्था राम भरोसे ही है। लोगों का कहना है कि सैकड़ों अस्पतालों और हजारों बेड की व्यवस्था भले कर लिया जाय लेकिन जब तक मानवतावादी तरीके से उनकी देखभाल तथा पैरामडिकल और जानकार स्टाफ द्वारा मरीजों का देखभाल नहीं कराया जायेगा तब तक चिकित्सा सुविधा का वास्तविक लाभ मिलना संभव नहीं है।

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