मां अन्नपूर्णा की दुर्लभ प्रतिमा का दर्शन कर सकेंगे जौनपुर के भी लोग

अंग्रेजी राज में 100 साल पहले काशी से चोरी गई प्रतिमा की दिल्ली से काशी तक की शोभायात्रा बढ़ी लखनऊ की ओर, पीएम मोदी के प्रयास से लौटी प्रतिमा की पुर्नस्थापना 15 नवंबर को

जौनपुर। करीब 100 साल पहले ब्रिटिश काल में काशी से चोरी होकर कनाडा गई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति 14 नवंबर को काशी लौट रही है। मूर्ति कनाडा की यूनिवर्सिटी आफ रेजिना में मिली है। मूर्ति के एक हाथ में खीर और दूसरे हाथ में अन्न है। पौराणिक मान्यता के अनुसार एक बार पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गई और प्राणी अन्न को तरसने लगे थे | तब माता पार्वती अन्न की देवी अन्नपूर्णा के रूप में धरती पर प्रकट हुई थीं |सरकार की ओर से पुनर्स्थापना की तैयारी हो रही है। इधर भाजपा भी कार्यक्रम में जुट गई है। 15 नवंबर को मूर्ति की स्थापना मंदिर में होगी। दिल्ली से चली प्रतिमा की शोभायात्रा जौनपुर सहित प्रदेश के 18 जिलों से होकर काशी पहुंचेगी।

दिल्ली से गुरुवार को प्रतिमा एक भव्य शोभायात्रा के साथ लखनऊ प्रस्थान कर चुकी है।14 नवंबर को पुनर्स्थापना यात्रा के माध्यम से माँ अन्नपूर्णा 18 जिलों में भक्तों को दर्शन देते हुए अयोध्या से जौनपुर होते हुए वाराणसी पहुंचेगी। सड़क मार्ग से काशी पहुंचने के बाद 15 नवंबर को प्रबोधिनी एकादशी की उदया तिथि पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में माता अन्नपूर्णा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। प्रतिमा 14 नवंबर को जौनपुर की सीमा में प्रवेश करेगी जहां से मुंगराबादशाहपुर के पास स्थित दौलतिया मंदिर जिले में प्रतिमा का पहला पड़ाव होगा। वहां से प्रतिमा मछलीशहर, सिकरारा होते हुए जौनपुर शहर के कोतवाली चौराहा पहुंचेगी। जहां पर यात्रा का भव्य स्वागत एवं मुख्य कार्यक्रम होगा। 14 नवंबर की रात मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा का रात्रि विश्राम पिंडरा में निर्धारित है।

मां अन्नपूर्णा के लिए काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में रानी भवानी उत्तरी गेट के बगल में मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। मंदिर परिक्षेत्र के ईशान कोण में ही निर्मित मंदिर में माता की प्रतिमा विराजमान होंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों से भारत को वापस मिली यह दुर्लभ प्रतिमा गुरुवार को दिल्ली में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद को सौंपा गया। गौरतलब है कि पीएम मोदी के अमेरिका दौरे के बाद 157 ऐसी ही धरोहरों की वापसी का रास्ता साफ हुआ है। अन्य भी जल्द भारत लाई जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में 2014 के बाद से अब तक 42 दुर्लभ और बेशकीमती धरोहरों की देश वापसी हो चुकी है।

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