“सिन्धु का शेर जालंधर” के मंचन को खूब सराहा लोगों ने

चित्रकूट धाम से आयी हनुमत मंडली का प्रस्तुतीकरण

जौनपुर | मुंगराबादशाहपुर कस्बे के मोहल्ला साहबगंज में स्थित श्रीराम लीला कमेटी के मंच पर चित्रकूट धाम से आए हनुमत मंडली के कलाकारों ने अंतिम दिवस पर शनिवार की शाम को “सिन्धु का शेर जालंधर” नाटक का बेहतरीन मंचन किया। नाटक की पटकथा के अनुसार दैत्यों का राज्य भोलेनाथ के पास तथा देवताओं का राज्य अभिमानी इंद्र के पास था। इन्द्र दैत्यों का राज्य भोलेनाथ से लेना चाहते थे। जब भोलेनाथ ने इसे देने से इंकार किया तो इंद्र ने भोलेनाथ को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं अपने वज्र से कैलाश पर्वत को चूर चूर कर दूंगा। भगवान शिव ने अपनी माया से इंद्र का घमंड चूर करने के लिए सिंधु का शेर जालंधर को पैदा किया। शिव ने त्रिशूल, ब्रह्रमा ने ब्रह्रास्त्र और लक्ष्मीनारायण ने चक्र सुदर्शन जालंधर को दिया। सब देवता शक्ति हीन हो गए। जालंधर ने इंद्र को मारकर उनका राज पाट लेने के लिए उन पर चढ़ाई कर दिया। इंद्र अपनी प्राण सुरक्षा के लिए भोलेनाथ की शरण में भागकर गए।तब भोलेनाथ ने अपनी माया से जालंधर का वध किया। हर हर महादेव के जयकारों से लीला परिसर गूंज उठा। भोलेनाथ (सूर्य पाल), जालंधर (लवकुश पाण्डेय), वृंदा (अनिल उर्फ नीलू),इंद्र (तरुरेन्द्र), नारद (सोनू मिश्रा),विष्णु (लखन लाल) की भूमिका सराही गयी। आयोजकों की तरफ से बृजेश कुमार गुप्त ने कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आभार प्रकट किया। कमेटी के अध्यक्ष प्रभाकर जी गुप्त चुन्ने, उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार गुप्त बाबा, कोषाध्यक्ष सच्चिदानंद गुप्त ने प्रभु श्रीराम की झांकी की आरती उतारी और लीला को संपन्न कराने वाले सहयोगियों को धन्यवाद दिया।

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