पेंशनर्स डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनवा सकेंगे डाकघर में भी

स्वत: अपडेट हो जाएगा पेंशन जारी करने वाले विभाग में ,जौनपुर के प्रधान डाकघर में आदेश न आने का हवाला,अव्यवस्था से लोग त्रस्त .

जौनपुर। अब कोई भी पेंशनधारी अपने निकट के डाकघर में जाकर या पोस्टमैन के माध्यम से अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनवा सकता है। डाकघर में इस सेवा के शुरू होने से पेंशनर को काफी सुविधा होगी। सरकारी सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार इस सेवा का लाभ ग्रामीण क्षेत्र के पेंशनर्स अपने नजदीकी शाखा डाकघर में ले सकेंगे। इसके कारण उन्हें दूर शहर या बैंकों में जाकर लाइनों में लगने से होने वाली परेशानी से छुटकारा मिलेगा। इस सेवा का लाभ लेने के लिए पेंशनर्स के पास पीपीओ नंबर, आधार नंबर और मोबाइल नंबर होना अनिवार्य है। डाककर्मी आधार के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र निर्गत कर देंगे, जो पेंशन जारी करने वाले विभाग में स्वत: अपडेट हो जाएगा। पेंशनर्स को इसके लिए मात्र 70 रुपये अदा करने होंगे। केंद्र या राज्य सरकार के पेंशनर को हर वर्ष एक नवंबर से 31 दिसंबर के बीच में जीवन प्रमाण पत्र देना पड़ता है, ताकि उन्हें पेंशन का पैसा मिलता रहे। किसी भी बैंक में पेंशनर्स का पेंशन आता हो, वे अपना जीवन प्रमाण पत्र डाकघर में बनवा सकेंगे।

दूसरी तरफ स्थानीय प्रधान डाकघर के जिम्मेदार अधिकारी यह नई व्यवस्था संज्ञान में होने की जानकारी तो दे रहे हैं लेकिन अभी इस संदर्भ में कोई आदेश नहीं आने की बात कह रहे हैं। प्रधान डाकघर के पोस्ट मास्टर ओम प्रकाश रजक ने ‘जौनपुर टाइम्स’ से बातचीत के दौरान कहा कि संदर्भित आदेश आने के बाद ही वे इस व्यवस्था का विवरण दे सकेंगे। गौरतलब है कि काफी दिनों से स्थानीय प्रधान डाकघर में पूर्णकालिक अधीक्षक नहीं हैं। वाराणसी के अधीक्षक प्रजापति के पास ही जौनपुर का भी कार्यभार है लेकिन वाराणसी के प्रधान डाकघर में अपनी व्यस्तता का हवाला देकर वे यदा-कदा ही जौनपुर आते हैं। स्थायी अधीक्षक के अभाव में प्रधान डाकघर में अव्यवस्था का आलम है। विशेष रुप से अशक्त और वृद्ध पेंशनरों को इससे काफी परेशानी होती है। डाकघर के कर्मचारी महज नौकरी करते और काम निपटाते ही देखे जा रहे हैं। उपभोक्ताओं की लंबी लाइन लगी होने पर भी उनका रवैया उपभोक्ताओं के प्रति उदासीन और टालने वाला दिखाई देता है। महत्वपूर्ण पटल पर तैनात एक महिला सहित कुछ कर्मचारी तो आपस में व्यक्तिगत बातचीत में अधिक रूचि लेते हुए बीच में अनमने ढंग से काम निपटाने की उनकी प्रवृत्ति सब काम छोड़कर वहां पहुंचे लोगों के लिए दुखदाई साबित हो रही है।

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