हमारी संस्कृति हम और हमारा सब कुछ बचा रहेगा गाय और गौशालाओं के बचने से ही

अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा गोपाष्टमी समारोह में

जौनपुर । गंगा महासभा और अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने आज यहां कहा कि गांव पूजा और गोपाष्टमी का आयोजन तभी सार्थक सिद्ध होगा जब हम सब लोग साल भर गायों के पालन और गौशालाओं की व्यवस्था में यथासंभव योगदान करें। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का स्थान दिया गया है। जिस तरह हमको साल में एक बार अपनी माता के लिए कुछ करके बाकी दिन उनकी उपेक्षा नहीं करनी है, उसी तरह हमें गायों के संवर्धन और गौशालाओं की व्यवस्था सुधारने के लिए नियमित रूप से कुछ न कुछ करना ही होगा। स्वामी जी ने कहा की गाय हमारी संस्कृति से जुड़ी हुई है। गाय और गौशालाओं बची रहेंगी तो हमारी संस्कृति बची रहेगी, हमारी संस्कृति बची रहेगी तो हम बचे रहेंगे, हम बचे रहेंगे तो सब कुछ बचा रहेगा।


स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती रविवार को शहर के ढालगर टोला स्थित श्री पिंजरापोल पशु अनाथालय गौशाला परिसर में आयोजित गोपाष्टमी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इसके पूर्व उन्होंने गौशाला प्रबंधन से जुड़े लोगों तथा अन्य प्रमुख लोगों के साथ गौ माता की पूजा की और उनको भोग लगाया। गोपाष्टमी कार्यक्रम का आरंभ गौ माता और गोपाल की पूजा से हुआ गौशाला प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष किशन लाल हरलालका और उनकी पत्नी ने विधिपूर्वक पूजा अर्चना किया। भाजपा नेता श्याम मोहन अग्रवाल ने औपचारिक रूप से मुख्य अतिथि का परिचय कराया। इस अवसर पर मुख्य रूप से वरिष्ठ संपादक कैलाश नाथ, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो.आर.एन.त्रिपाठी, समाजसेवी दिनेश प्रकाश कपूर, प्रज्ञा प्रवाह के विभाग संयोजक संतोष त्रिपाठी, उमेश नाथ मंदिर के महंत बाबा महेंद्र दास त्यागी, माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष संतोष कुमार सिंह, चंद्रसेन सिंह, नीरज श्रीवास्तव, शशांक सिंह रानू, ब्रह्मेश शुक्ल, विजय कुमार अस्थाना अशोक मिश्र, उज्ज्वल कुमार आदि लोग उपस्थित रहे।


गौरतलब है कि भगवान श्री कृष्ण ने गौ चारण आरंभ करने की शुभ तिथि थी कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष अष्टमी। उनके गौ-चारण आरंभ करने के कारण यह तिथि गोपाष्टमी कहलाई। गौ अष्टमी के दिन गोवर्धन, गाय और बछड़े तथा गोपाल की पूजन का विधान है। शास्त्रों में कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन गायों को भोजन खिलाता है, उनकी सेवा करता है तथा सायं गायों का पंचोपचार विधि से पूजन करता है तो उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। ऐसी मान्‍यता है कि गोपाष्‍टमी के दिन गौ सेवा करने वाले व्‍यक्‍ति के जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता।गोपाष्टमी का उद्देश्य है, गौ-संवर्धन की ओर ध्यान आकृष्ट करना। तनाव और प्रदूषण से भरे इस वातावरण में गाय की संभावित भूमिका समझ लेने के बाद गोधन की रक्षा में तत्परता ही गोविंद-गोपाल पूजा की सार्थकता है।

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