श्री हरि के योगनिद्रा से जागने पर घरों में शालिग्राम का हरिप्रिया के साथ पाणिग्रहण

जौनपुर। देव प्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु के चार महीने की योगनिद्रा से जागने पर उनका शालिग्राम के रूप में तुलसी के साथ विवाह करवाने की परंपरा है। समूचे जिले में एकादशी की शाम को घरों और मंदिरों में दीये जलाए गए और सूर्यास्त होने पर श्रद्धापूर्वक भगवान शालिग्राम और हरिप्रिया (तुलसी) का विधि – विधान से विवाह करवाया गया। एकादशी पर घरों और मंदिरों में गन्नों से मंडप सजाकर उसके नीचे भगवान विष्णु की प्रतिमा विराजमान कर मंत्रों से भगवान विष्णु का आह्वान करते हुए उनकी पूजा – अर्चना की गई। पूजा में अन्य परंपरागत भोग के साथ ही मौसमी सब्जियों सहित सिंघाड़ा, आंवला, बेर, मूली, सीताफल, अमरुद और अन्य ऋतु फल चढाए गये।

जानकारों का कहना है कि इस परंपरा से सुख और समृद्धि बढ़ती है। मान्यता है कि देव प्रबोधिनी एकादशी पर तुलसी विवाह से अक्षय पुण्य मिलता है और हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं। जिन घरों में कन्या नहीं है और वो कन्यादान का पुण्य पाना चाहते हैं तो वह तुलसी विवाह कर के प्राप्त कर सकते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण का कहना है कि सुबह तुलसी का दर्शन करने से अक्षय पुण्य फल मिलता है। साथ ही इस दिन सूर्यास्त से पहले तुलसी का पौधा दान करने से भी महा पुण्य मिलता है। वनस्पति शास्त्रियों के मुताबिक तुलसी का पौधा नेचुरल एयर प्यूरिफायर है। यह पौधा करीब 12 घंटे ऑक्सीजन छोड़ता है और वायु प्रदूषण को कम करता है। इसमें यूजेनॉल कार्बनिक यौगिक होता है, जो मच्छर, मक्खी व कीड़े भगाने में मदद करता है।

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