पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर जौनपुर के रामघाट पर पंचतत्व में विलीन

*हर व्यक्ति को साथ लेकर चलने में रखते थे विश्वास, किसी से भी कोई वैमनस्यता नहीं

जौनपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष और बसपा विधायक सुखदेव राजभर बुधवार को दोपहर जौनपुर के रामघाट पर पंचतत्व में विलीन हो गए। अपने संवेदनशील व्यवहार के कारण वह तीन बार लालगंज और दो बार दीदारगंज विस क्षेत्र से विधायक चुने गए। शोषित समाज के लिए लीक से हटकर कार्य करने के कारण लोग सुखदेव राजभर को काफी सम्मान देते थे। वह हर व्यक्ति को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। उनकी किसी से भी कोई वैमनस्यता नहीं थी। खास बात है कि जौनपुर में भी उनसे व्यक्तिगत और आत्मीय संबंध रखने वाले लोगों की भी अच्छी संख्या है। वह कहते थे कि अगर किसी का भला नहीं कर सकते तो उसका बुरा भी मत करो। वह सभी को संतुष्ट करने की कोशिश करते थे।
रामघाट पर उनके पुत्र कमलाकांत उर्फ पप्पू ने मुखाग्नि दी। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को अंतिम विदाई देने के लिए घाट पर भारी भीड़ उमड़ी। आजमगढ़ के बड़गहन स्थित पैतृक आवास से निकली शव यात्रा दोपहर में रामघाट पहुंची। जिसके बाद विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सुरक्षा का भी व्यापक प्रबंध रहा। कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, पूर्व मंत्री रामअचल राजभर, दारा सिंह चौहान, पूर्व मंत्री जगदीश नारायण राय, सपा के विधायक व पूर्व मंत्री शैलेंद्र यादव ललई समेत कई प्रमुख नेता इस मौके पर मौजूद रहे। गौरतलब है कि कई दिनों से बीमार चल रहे सुखदेव राजभर का सोमवार को लखनऊ स्थित एक अस्पताल में निधन हो गया था। मंगलवार शाम उनका पार्थिव शरीर आजमगढ़ के बड़गहन स्थित पैतृक आवास पर लाया गया था। जहां लोगों के अंतिम दर्शन के बाद बुधवार को उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए जौनपुर के रामघाट पर लाया गया।
अपने राजनीतिक सफर के दौरान सुखदेव राजभर राममंदिर निर्माण को लेकर 1991 में भाजपा की लहर के समय लालगंज सामान्य सीट से चुनाव लड़े और उन्होंने भाजपा के दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह को हराते हुए पहली जीत दर्ज की। इसके बाद उन्होंने 1993 के हुए चुनाव में भी जीत दर्ज की। लेकिन 1996 में हुए चुनाव में नरेंद्र सिंह के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन 2002 और 2007 के चुनाव में लालगंज विधानसभा सीट से फिर विधायक बने। इसके बाद 2012 में हुए चुनाव में नए परिसीमन के बाद बनी दीदारगंज सीट से चुनाव लड़े, लेकिन सपा के आदिल शेख से हार गए। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आदिल शेष को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया।

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