मजिस्ट्रेट द्वारा की गई एफआईआर एक वर्ष बाद दर्ज हुई थाने में

जौनपुर। मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई तहरीर पर जब पुलिस को मुकदमा दर्ज करने में एक वर्ष लग गया तो आम आदमी की हालत का अंदाजा लगाना सहज है। किशोर न्याय बोर्ड से अभियुक्त ने ही गंभीर अपराध से जुड़ी पत्रावली एक वर्ष पूर्व गायब कर दिया था। घटना के दो महीने बाद मजिस्ट्रेट द्वारा थाना लाइन बाजार में तहरीर दी गई और एक वर्ष बाद एफ आई आर दर्ज हुई।

खबर मिली है कि
किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट द्वारा 21 मार्च 2020 को लाइन बाजार थाने में तहरीर दिया गया कि महाराजगंज थाने के जनौर निवासी राजेश यादव का किशोर न्याय बोर्ड में मुकदमा चल रहा है जो धारा 489 ख व 489 ग आईपीसी (जिसमें उम्र कैद से दंडनीय सजा का प्रावधान है) कूट रचित करेंसी नोट या सिक्के के प्रयोग से जुड़ा हुआ मामला है। इस पत्रावली में 23 जनवरी 2020 तिथि नियत थी। अभियुक्त राजेश नियत तिथि पर हाजिर हुआ था।

किशोर न्याय बोर्ड के कार्यालय के कर्मचारी अमरेश ने पत्रावली पर हस्ताक्षर करने के लिए आरोपी राजेश को पत्रावली सुपुर्द किया था।राजेश मौके का फायदा उठाकर पत्रावली कोर्ट से लेकर रफूचक्कर हो गया। दो महीने तक जब कोई पता नहीं चला तब मजिस्ट्रेट ने लाइन बाजार थाने में अभियुक्त राजेश के खिलाफ तहरीर देकर एफआईआर दर्ज करने को कहा। थाने की पुलिस ने 21 मार्च 2020 को दी गई तहरीर पर 13 जनवरी 2021 को लाइनबाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज की और कॉपी दीवानी न्यायालय भेजी गई।

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