प्रशासक नियुक्त होने की आशंका से ग्राम प्रधानों में बेचैनी, हुआ तो विरोध तय

नई ग्राम पंचायत गठन तक प्रधान को ही प्रशासक बनाने की‌ राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने की मांग

जौनपुर। पूरे पांच साल अपनी अपनी ग्राम सभा पर राज करने वाले ग्राम प्रधान अब अपनी अपना कार्यकाल समाप्त होने के समय बेहद परेशान हैं उन्हें आशंका है कि प्रशासक के तौर पर एडीओ पंचायत को अधिकार मिल जाएगा। ग्राम प्रधानों को किसी प्रशासनिक अधिकारी का प्रशासक बनना नहीं सुहा रहा है। कई ग्राम प्रधान नहीं चाहते कि उनके कार्यकाल की फाइलें किसी अधिकारी के कब्जे में जाएं। गौरतलब है कि ग्राम प्रधानों द्वारा कराए गए कार्यों को लेकर कई ग्राम सभाओं में शिकायतें भी होती रही हैं। ग्राम प्रधानों की मांग है कि नई ग्राम पंचायत गठन तक प्रधान को ही प्रशासक बनाया जाय।

राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार यादव के नेतृत्व में रविवार को सोंधी ब्लाक में इसी मुद्दे को लेकर एक बैठक आयोजित हुई। निर्णय लिया कि यदि किसी प्रशासनिक अधिकारी को प्रशासक बनाया जाता है तो वे न्यायालय की शरण लेंगे। आगामी 25 दिसम्बर को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है। बैठक में डा. मनोज यादव ने कहा कि धारा 12,3 (क) में लखनऊ हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल किया गया है। उनका यह भी कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी कभी प्रशासक नहीं हो सकता। मांग है कि नई ग्राम पंचायत गठन तक प्रधान को ही प्रशासक बनाया जाय। यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे जिले के सभी ब्लाकों में धरना प्रदर्शन एवं तालाबंदी करने को बाध्य होंगे।

बैठक की अध्यक्षता ब्लाक अध्यक्ष गयासुद्दीन ने की। बैठक में विशाल यादव, राजकुमार यादव, बाबा सिंह, कृष्ण दत्त तिवारी, थानेदार, जसवंत राजभर, शिवपूजन राव, मो.शाहिद, महेन्द्र, विनोद कुमार यादव, मो.अरशद, कमलेश बिंद, राधेश्याम यादव समेत दर्जनों ग्राम प्रधान मौजूद रहे। दूसरी तरफ पंचायत चुनाव पर बड़ी गंभीरता के साथ फोकस कर रही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पिछली पंचायतों में सपा बसपा द्वारा बाहुबलियों और गलत लोगों को चुनाव जिताने का आरोप लगा कर ग्राम प्रधानों की धड़कनें तेज कर दी हैं। उन्हें डर है कि सत्तारूढ़ भाजपा उन को कमजोर करने के लिए प्रशासक की नियुक्ति का माहौल बना रही है और उसकी बुनियाद तैयार कर रही है।

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