विसर्जन के साथ ही जौनपुर में दुर्गा पूजा उत्सव का समापन

जौनपुर। शारदीय नवरात्रि पर आयोजित होने वाले परंपरागत दुर्गा पूजा उत्सव का सोमवार को विसर्जन के साथ है ही विधिवत समापन हो गया। नौ दिनों तक बहुत ही सादे ढंग से बिना सजावट शोरगुल और तामझाम के मनाए गए पूजा उत्सव की तरह इस वर्ष दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन भी सिर्फ श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने तक सीमित रहा। हर वर्ष की तरह निकलने वाली भव्य, आकर्षक और दर्शनीय शोभा यात्रा नहीं निकाले जाने के पहले से ही हुए फैसले के कारण इस बार रात्रि की जगह दिन में प्रतिमाओं के विसर्जन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। सार्वजनिक पूजा आयोजन करने वाली दुर्गा पूजा समितियों द्वारा सोमवार को सुबह से ही प्रतिभाओं के विसर्जन का कार्य आरंभ कर दिया गया। पहले से ही निर्धारित नियम के अनुरूप छोटी गाड़ी या ठेले से विसर्जन घाट लाकर दुर्गा प्रतिमाओं, कलशों और पूजा में प्रयुक्त अन्य सामग्रियों का विसर्जन किया गया। नदियों को प्रदूषित न करने के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्देशों के अनुपालन में दुर्गा प्रतिमाओं को पिछली बार की तरह गोमती नदी के बगल में अलग बनाए गए कुंड में श्रद्धापूर्वक विसर्जित किया गया, जबकि कलश का विसर्जन नदी की मुख्यधारा में हुआ। विसर्जन घाट पर प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी।

 

शहर की दुर्गा पूजा समितियों की केंद्रीय संस्था श्री दुर्गा पूजा महासमिति के पदाधिकारी विसर्जन घाट पर समितियों के सहयोग के लिए मौजूद रहे। महासमिति के सूत्रों में बताया कि विसर्जन घाट पर करीब 170 प्रतिमाओं के विसर्जन का अनुमान है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष दुर्गा पूजा पंडालों में कड़े मानकों का पालन करते हुए सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होने के कारण कई लोगों के बंगाल की तर्ज पर अपने घरों में भी छोटी-छोटी दुर्गा प्रतिमा की स्थापना किया था। कुछ उत्साही बच्चों ने अपने हाथ से भी दुर्गा जी की प्रतिमा बनाकर परिवार सहित पूजा का आयोजन किया। ऐसी प्रतिमाओं का विसर्जन भी नदी के किनारे बने कुंड में हुआ।

सुबह से शुरू हुआ विसर्जन का कार्यक्रम शाम तक चलता रहा। जगह जगह स्थापित दुर्गा प्रतिमाओं को समितियों के उत्साही स्वयंसेवक नाचते गाते हुए समूह में विसर्जन के लिए ले गए। इस दौरान विसर्जन घाट से लेकर सभी मार्गों और प्रमुख स्थानों पर पुलिस के जवान तैनात रहे। अनेक स्थानों पर पुलिस के सतर्क जवानों ने प्रतिमाओं के साथ जा रहे उत्साही युवकों और बच्चों को रोक कर वापस कर दिया। गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने श्री दुर्गा पूजा महासमिति के पदाधिकारियों के साथ नवरात्रि के पूर्व हुई बैठक में स्पष्ट कर दिया था कि विसर्जन के लिए उन्हें छोटी गाड़ी में प्रतिमाओं को ले जाना होगा। साथ ही प्रत्येक प्रतिमा के साथ सिर्फ पांच स्वयंसेवकों को ही विसर्जन के लिए जाने की इजाजत रहेगी। विसर्जन स्थल पर तैनात कर्मचारी आवश्यकता पड़ने पर विसर्जन में यथायोग्य सहयोग करेंगे।

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