अखिल भारतीय हड़ताल में दवा प्रतिनिधियों ने भी दी महाआहुति

जौनपुर । एफ.एम.आर.ए.आई. एवं केंद्रीय श्रम संगठनों, औद्योगिक फेडरेशन व कर्मचारी संगठनों के देशव्यापी आम हड़ताल के आह्वान पर यू.पी.एम.एस.आर.ए.जौनपुर इकाई के सारे दवा प्रतिनिधि भी आज गुरुवार को हड़ताल पर रहे और अन्य श्रमिक संगठनों के साथ मिलकर अपना विरोध जताया। आज की महा हड़ताल में दवा प्रतिनिधियों की माँगे हैं कि मजदूर विरोधी लेबर कोड वापस लिया जाये, आवश्यक वस्तु अधिनियम में कोई बदलाव न किया जाये, वेतन में कटौती ना की जाए तथा कर्मचारियों को नौकरी से ना निकाला जाये, यूसीपीएमपी ( यूनिफॉर्म कोड आफ फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिसेज ) कोड को वैधानिकता प्रदान किया जाये,दवाओं व चिकित्सकीय उपकरणों पर जीएसटी शून्य किया जाये, न्यूनतम वेतनमान रुपये 21 हजार प्रतिमाह किया जाये। छ: माह क़ा मैटरनिटी लीव (मातृत्व अवकाश) सेल्स प्रमोशन एम्प्लाइज के लिए घोषित किया जाये, सेल्स प्रमोशन एम्प्लाइज के लिए काम के घंटे 8 का कार्य दिवस तय किया जाये,पेट्रोलियम पदार्थों के दाम कम किये जाएं और किसान विरोधी अध्यादेश व कानूनों को वापस लिया जाये ।

आज सुबह 9.30 बजे से 11.30 बजे तक दवा प्रतिनिधियों ने शहर के प्रमुख स्थानों पालीटेक्निक चौराहा,वाजिदपुर ,जेसीज,सिपाह, डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल ,नईगंज में पिकेटिंग पॉइंट बना कर आपने साथियों को हड़ताल के बारे में बताया। उसके बाद सैकड़ों की संख्या में दवा प्रतिनिधियों ने एकत्र होकर कलेक्ट्रेट प्रांगण में अन्य 10 केन्द्रीय श्रमिक संगठनों, फेडरेशन एवं संगठनों के संयुक्त कार्यक्रम में हिस्सा लिया। संगठन के प्रांतीय सचिव नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि आज की इस हड़ताल की जिम्मेदार केंद्र और राज्य सरकार है, जो लगातार दवा प्रतिनिधियों के विरोध और उनके द्वारा भेजे गऐ ज्ञापनों को नजरंदाज कर रही है। पिछले 7 महीनों से दवा प्रतिनिधि लगातार श्रम कानूनों में किये गये बदलाव को लेकर कोरोना के समय में सरकारी बंदिशों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न तरीकों से अपना विरोध दर्ज कराते हुए केंद्र और राज्य सरकार को अपनी माँगों को लेकर ज्ञापन भेज रहे थे। परंतु सरकार ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिससे नियोक्ताओं का शोषण दिनप्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। लिहाजा मजदूर वर्ग और दवा प्रतिनिधि इस हड़ताल के लिए विवश हुये। इकाई अध्यक्ष अजय चौरसिया ने बताया कि इस आपदाकाल में जहां एक तरफ करोना जैसी महामारी से मजदूर वर्ग संघर्ष कर रहा है तो दूसरी तरफ सरकार ने श्रमिकों के एकमात्र कानून सेल्स प्रमोशन एम्पलाइज एक्ट 1976 को ही बदल डाला और मजदूर वर्ग को बंधुआ मजदूर बनने के लिए विवश कर दिया, उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने हमारी इन मांगों को पूरा नहीं किया तो दवा प्रतिनिधि इस से भी बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहेंगे। आज की इस महाहड़ताल में मनोज सिंह, अमित रंजन श्रीवास्तव, आलोक सिंह, अजय सिंह, सुनील प्रजापति के साथ समस्त कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।

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