चौरी चौरा कांड के सौ साल पूरा होने पर “चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव” का आयोजन

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण घटना है चौरी चौरा कांड, 4 फरवरी को होंगे विभिन्न कार्यक्रम

जौनपुर। चौरी चौरा कांड के सौ साल पूरा होने पर राज्य सरकार ने इसकी वर्षगांठ मनाने और साल भर तक इसके कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया है। जिसके संबंध में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश देते हुए कहा कि 4 फरवरी को संपूर्ण जनपद में चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव उल्लास के साथ मनाया जाए। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि 4 फरवरी 2021 से 4 फरवरी 2022 की अवधि में “चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव” का आयोजन पूरे प्रदेश में किए जाने का निर्णय शासन द्वारा लिया गया है।

4 फरवरी को संपूर्ण जनपद में चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव उल्लास के साथ मनाया जाएगा। सभी शहीद स्थलों पर साफ-सफाई करायी जायेगी। कार्यक्रम का आयोजन सभी विकास खंडों, शहीद स्थलों तथा शहीद ग्रामों में किया जाएगा, जिसमें जनप्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया जाएगा।चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव की राज्य स्तरीय आयोजन समिति द्वारा अनुमोदित तथा लोकार्पित प्रतीक चिन्ह का प्रयोग समस्त सरकारी पत्राचारों प्रकाशनों, स्टेशनरी एवं वर्ष भर आयोजित होने वाले समस्त आयोजनों में अनिवार्य रूप से किया जाएगा। पूर्वान्ह 10 बजे वंदे मातरम का गायन सभी स्वतंत्रता संग्राम स्थलों,शहीद स्मारकों एवं शैक्षणिक संस्थानों में किया जाएगा। पूर्वान्ह 10:15 पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया जाएगा। 4 फरवरी को चौरी चौरा शताब्दी महोत्सव के अवसर पर संपूर्ण जिले के ग्रामों, विद्यालयों, शहीद स्थलों में प्रातः 8:30 बजे एन.एस. एस.,एनसीसी, सिविल डिफेंस, स्काउट गाइड, समाजसेवी/स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा प्रभात फेरी निकाली जाएगी।

गौरतलब है कि चौरी चौरा कांड हमारे स्वतंत्रता आंदोलन का ही एक अंग है। यह घटना 4 फरवरी 1922 को ब्रिटिश भारत में तत्कालीन संयुक्त प्रांत (बाद का अविभाजित उत्तर प्रदेश) के गोरखपुर जिले के चौरी चौरा में हुई थी, जब असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा समूह पुलिस के साथ भिड़ गया था। जवाबी कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों ने हमला किया और एक पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी, जिससे उनके सभी कब्जेधारी मारे गए। इस घटना में 30 नागरिकों और 22 पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। हिंसा के सख्त खिलाफ रहने वाले महात्मा गांधी ने इस घटना के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में 12 फरवरी 1922 को राष्ट्रीय स्तर पर असहयोग आंदोलन को रोक दिया था। चौरी-चौरा कांड के अभियुक्तों का मुक़दमा महामना पंडित मदन मोहन मालवीय (बीएचयू के संस्थापक) ने लड़ा और उन्हें बचा ले जाना उनकी एक बड़ी सफलता थी।चौरीचौरा कांड समेत स्‍वतंत्रता संग्राम में गोरखपुर पीठ के महंत दिग्विजयनाथ ने बड़ी भूमिका निभाई थी, लेकिन साक्ष्य के अभाव में पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाई थी।

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