जगतगुरू रामभद्राचार्य के 72वें अवतरण दिवस महोत्सव का वृहद आयोजन

जन्मभूमि पर अवतरण दिवस महोत्सव में जुटेंगे प्रदेश के तीन मंत्री भी, कई शिलान्यास व लोकार्पण

जौनपुर। जगतगुरू रामभद्राचार्य के 72वें जन्म दिवस के मौके पर उनके पैतृक गांव सचीपुरम साड़ी खुर्द में उत्तर प्रदेश के मंत्रियों और बड़े नेताओं का जमावड़ा होने जा रहा है। इस मौके पर कई विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण भी होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायी एवं न्याय, ग्रमीण अभियंत्रण विभाग मंत्री बृजेश पाठक तथा विशिष्ट अतिथि बेसिक शिक्षा मंत्री डाॅ. सतीश चंद्र द्विवेदी व ग्राम्य विकास विभाग के मंत्री राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोती होंगे।

प्रोटोकाल के अनुसार सोमवार को मंत्री विधायी एवं न्याय, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग बृजेश पाठक 8 फरवरी को अपराह्न 2 बजे पदम विभूषण जगतगुरु स्वामी रामभद्राचार्य के पैतृक निवास सचीपुरम ग्राम साड़ी खुर्द, सुजानगंज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करेंगे। मंत्री, ग्राम्य विकास विभाग एवं समग्र ग्राम विकास राजेंद्र प्रताप सिंह (मोती सिंह) 8 फरवरी को 12:30 बजे ग्राम पंचायत कुरावा, विकासखंड सुजानगंज एवं ग्राम पंचायत जमुहर, विकासखंड मछलीशहर में निर्मित अटल मनरेगा पार्क का लोकार्पण, ग्राम पंचायत कुरावा विकासखंड सुजानगंज में अटल आवासीय परिसर का लोकार्पण करेंगे।

फाईल फोटो

अपराह्न 2:30 बजे ग्राम साड़ी खुर्द सचीपुरम, सुजानगंज में ग्राम पंचायत के मुख्य द्वार का शिलान्यास एवं पूज्य जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी के 72 वें अवतरण दिवस महोत्सव में प्रतिभाग करेंगे। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी 8 फरवरी को अपराह्न 12 बजे विधायक बदलापुर रमेश चंद्र मिश्र के आवास पर उनके स्वर्गवासी बड़े पिताजी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। अपराह्न 2 बजे साड़ी खुर्द, सचीपुरम, सुजानगंज में जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी की पैतृक जन्मभूमि में जन्मोत्सव कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रतिभाग करेंगे।

गौरतलब है कि जौनपुर जिले के मूल निवासी जगद्गुरु रामभद्राचार्य ( पूर्वाश्रम नाम गिरिधर मिश्र) चित्रकूट में रहने वाले प्रख्यात विद्वान्, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद्, रचनाकार, प्रवचनकार, दार्शनिक और धर्मगुरु हैं। वे रामानन्द सम्प्रदाय के वर्तमान चार जगद्गुरु रामानन्दाचार्यों में से एक हैं और इस पद पर १९८८ ई से प्रतिष्ठित हैं। वे चित्रकूट में स्थित संत तुलसीदास के नाम पर स्थापित तुलसी पीठ नामक धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्थान के संस्थापक और अध्यक्ष हैं। वे चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के संस्थापक और आजीवन कुलाधिपति हैं। यह विश्वविद्यालय केवल चतुर्विध विकलांग विद्यार्थियों को स्नातक तथा स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और डिग्री प्रदान करता है।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य दो मास की आयु में नेत्र की ज्योति से रहित हो गए थे और तभी से प्रज्ञाचक्षु हैं।सत्रह साल की उम्र तक उनकी कोई औपचारिक शिक्षा नहीं हुई थी। उन्होंने सीखने या रचना करने के लिए कभी भी ब्रेल लिपि या किसी अन्य सहायता का उपयोग नहीं किया। रामभद्राचार्य 22 भाषाएं बोल सकते हैं। वे संस्कृत, हिंदी, अवधी, मैथिली और कई अन्य भाषाओं के लेखक हैं। उन्होंने चार महाकाव्य कविताओं सहित 100 से अधिक पुस्तकों को लिखा है। उन्हें संस्कृत व्याकरण, न्याय और वेदांत सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके ज्ञान के लिए स्वीकार किया जाता है। वे रामचरितमानस के एक महत्वपूर्ण संस्करण के संपादक हैं। वह रामायण और भागवत के लिए प्रसिद्ध कथाकार हैं।

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