‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ की 96वीं वर्षगांठ पर याद किए गए अमर शहीद क्रांतिकारी

*सरकार ने काकोरी घटना को 'कांड' कहना अपमानजनक मानते हुए किया खारिज, शहीद स्मारकों पर भव्य आयोजन

जौनपुर। ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ की सालगिरह के साथ काकोरी में क्रांतिकारियों द्वारा ब्रिटिश खजाना लूटने की वर्षगांठ पर आज समूचे जनपद के शहीद स्मारकों पर अमर शहीदों का कृतज्ञता के साथ स्मरण किया। काकोरी की घटना को ‘कांड’ के तौर पर याद किए जाने से असहमत प्रदेश सरकार ने उस घटना का उल्लेख ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के नाम से करना शुरू कर दिया है। इतिहास में भले ही इस घटना को ‘काकोरी कांड’ के नाम से जाना जाता हो, लेकिन इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने हर जगह आधिकारिक तौर पर इस घटना का ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के रूप में उल्लेख किया है काकोरी कांड को प्रदेश सरकार ने अपमानजनक माना है और इसलिए इसकी भाषा में बदलाव किया गया है।


“आजादी का अमृत महोत्सव” के तहत मनाए गए शहीद दिवस के अवसर पर शहीदों के सम्मान में जौनपुर पुलिस द्वारा अमर शहीदों को नमन किया गया , एएसपी सिटी द्वारा दीप प्रज्जवलित व माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि दी गयी। शहर कोतवाली पुलिस द्वारा कोतवाली चौराहा पर बैण्ड बाजे के साथ राष्ट्रीय गीत बजाकर शहीद दिवस मनाया गया। लोगों में मिष्ठान वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर, सदर और प्रभारी निरीक्षक कोतवाली मय फोर्स के मौजूद रहे। शहीद दिवस के अवसर पर थाना जफराबाद अन्तर्गत ग्राम हौज में स्थित शहीद स्मारक पर राष्ट्रीय सलामी शस्त्र के साथ पुष्प अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी। कार्यक्रम में क्षेत्राधिकारी नगर, प्रतिसार निरीक्षक पुलिस लाइन व थानाध्यक्ष जफराबाद मय फोर्स के मौजूद रहे।
गौरतलब है कि भारत की आज़ादी के लिए हुई सशस्त्र क्रांति के इतिहास में काकोरी कांड स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। सन 1925 की 9 अगस्त को एक ऐसी घटना घटी, जिसने अंग्रेजी हुकूमत की चूलें हिला दी थी। महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने लखनऊ के पास स्थित काकोरी नामक स्थान पर ट्रेन से जा रहा सरकारी खजाना लूट लिया था। इरादा खजाना लूट कर ब्रिटिश हुकूमत को सीधी चुनौती देना और उन पैसों से हथियार खरीदना था। ताकि अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष को मजबूती मिल सके। इसी घटना को काकोरी कांड के नाम से जाना जाता है।काकोरी कांड के आरोप में पंडित रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां और रोशन सिंह को फांसी दे दी गई थी। इस घटना के बारे में बाद में शहीद-ए-आजम भगत सिंह ने विस्तार से लिखा था। आज काकोरी में क्रांतिकारियों के एक्शन की 96वीं वर्षगांठ पर सभी ने उन अमर शहीदों को श्रद्धा – सुमन अर्पित किया।

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